जिला पंचायतों के अधिकार सीमित करना ग्रामीण लोकतंत्र पर हमला : लोकदल अध्यक्ष चौधरी सुनील सिंह
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- Updated: 11 July, 2026 08:47
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लखनऊ।
लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी सुनील सिंह ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जिला पंचायत चुनाव समय पर न कराए जाने तथा जिला पंचायत अध्यक्षों और उपाध्यक्षों को सीमित अधिकारों के साथ कार्यकाल विस्तार दिए जाने के प्रस्तावित कदम की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि यह फैसला लोकतंत्र, पंचायती राज व्यवस्था और संविधान के 73वें संशोधन की भावना पर सीधा हमला है।
चौधरी सुनील सिंह ने कहा कि सरकार चुने हुए जनप्रतिनिधियों को केवल नाम मात्र का अधिकार देकर वास्तविक नियंत्रण जिला प्रशासन और अफसरशाही के हाथों में सौंपना चाहती है। यह गांवों की सरकार पर अफसरशाही का कब्जा स्थापित करने की कोशिश है।
उन्होंने कहा कि यदि जिला पंचायत अध्यक्ष जनता के वोट से चुने गए हैं, तो उनके अधिकार सीमित क्यों किए जा रहे हैं? यदि सरकार लोकतंत्र में विश्वास करती है, तो समय पर पंचायत चुनाव कराने से डर क्यों रही है?
उन्होंने आरोप लगाया कि पंचायत चुनाव टालना और निर्वाचित प्रतिनिधियों को सीमित अधिकार देकर काम कराने की व्यवस्था ग्रामीण लोकतंत्र को कमजोर करने की साजिश है। गांवों के विकास, सड़क, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य योजनाओं का निर्णय जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों को करना चाहिए, न कि अफसरशाही को।
लोकदल की मांग है कि:
- जिला पंचायत चुनाव तत्काल घोषित किए जाएं।
- सीमित अधिकारों वाला कार्यकाल विस्तार वापस लिया जाए।
- जिला पंचायतों के सभी वैधानिक अधिकार निर्वाचित प्रतिनिधियों को दिए जाएं।
- जिला पंचायतों में अफसरशाही का अनावश्यक हस्तक्षेप समाप्त किया जाए।
चौधरी सुनील सिंह ने कहा कि "गांव की सत्ता गांव को दो। पंचायतों पर अफसरशाही नहीं चलेगी। चुनाव से भागना बंद करो और ग्रामीण लोकतंत्र की हत्या बंद करो।"

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