संसद में जनता के असली मुद्दों पर बहस से सरकार आखिर क्यों बच रही है?

संसद में जनता के असली मुद्दों पर बहस से सरकार आखिर क्यों बच रही है?

PPN NEWS

जब 543 सांसदों की आवाज नहीं सुनी जाती, तो 850 सांसदों की आवाज कैसे सुनी जाएगी? — चौधरी सुनील सिंह


संसद में जनता के असली मुद्दों पर बहस से सरकार आखिर क्यों बच रही है? किसान, बेरोजगार युवा, गांव, महंगाई और रोजगार जैसे सवालों का जवाब देने के बजाय संसद का ध्यान दूसरे मुद्दों की ओर क्यों मोड़ने के प्रयास में है- चौधरी सुनील सिंह


लखनऊ। लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी सुनील सिंह ने संसद की कार्यप्रणाली और देश के मूल मुद्दों को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आज देश के सामने सबसे बड़ी चुनौतियां किसान, ग्रामीण विकास, युवाओं को रोजगार, बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और आम जनता की आर्थिक परेशानियां हैं, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि जनता से जुड़े इन महत्वपूर्ण मुद्दों पर संसद में अपेक्षित चर्चा नहीं हो रही है। चौधरी सुनील सिंह ने कहा, “जब संसद में मौजूद 543 सांसदों की आवाज नहीं सुनी जाती, तो 850 सांसदों की आवाज कैसे सुनी जाएगी? लोकतंत्र में केवल जनप्रतिनिधियों की संख्या बढ़ाना महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि जरूरी यह है कि प्रत्येक जनप्रतिनिधि की आवाज सुनी जाए और जनता से जुड़े सवालों पर सार्थक बहस हो।

Pउन्होंने कहा कि संसद का समय ऐसे विषयों में व्यर्थ करने के बजाय किसानों की समस्याओं, ग्रामीण विकास, बेरोजगारी, युवाओं के रोजगार, महंगाई और आम नागरिक की आर्थिक परेशानियों पर ठोस चर्चा होनी चाहिए। देश की संसद को जनता की वास्तविक समस्याओं का समाधान तलाशने का मंच बनना चाहिए। चौधरी सुनील सिंह ने कहा संसद जनता की आवाज है।

वहां वही मुद्दे प्राथमिकता से उठने चाहिए, जिनसे देश के किसान, मजदूर, युवा और आम नागरिक का भविष्य जुड़ा है। लोकतंत्र की सार्थकता तभी है, जब जनता की आवाज सत्ता तक पहुंचे और उस पर गंभीरता से कार्रवाई हो।

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